भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार ने राज्य की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में 755 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी है। राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग ने इसे एक दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि इस फैसले से मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और शिक्षकों की कमी दूर होगी, जिससे पढ़ाई की क्वालिटी और मरीजों के इलाज दोनों में सुधार आएगा।
उन्होंने बताया कि हाल ही में तीन नए मेडिकल कॉलेजों में 250 एमबीबीएस सीटें जोड़ी गई हैं, जबकि 68 पीजी सीटों की भी वृद्धि की गई है, जिसके चलते प्रोफेसर सहित अन्य पदों का सृजन आवश्यक हो गया था।
किस विभाग में कितनी भर्तियां?
- प्रोफेसर: 07 पद
- एसोसिएट प्रोफेसर: 35 पद
- असिस्टेंट प्रोफेसर: 50 पद
- ट्यूटर: 29 पद
- सीनियर रेजिडेंट: 248 पद
- जूनियर रेजिडेंट: 190 पद
- कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर: 112 पद
- ब्लड बैंक ऑफिसर: 84 पद
राज्य में कितने सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं?
वर्तमान में ओडिशा में कुल 15 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। इनमें से 14 संस्थान राज्य सरकार द्वारा संचालित हैं, जबकि एक केंद्रीय स्वायत्त संस्थान (एम्स भुवनेश्वर) है। इन सभी संस्थानों को मिलाकर राज्य के सरकारी क्षेत्र में कुल 1,925 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं।
पर्यटन को बढ़ावा देने वाली दो प्रमुख योजनाओं को मंजूरी
एक अन्य खबर में, ओडिशा मंत्रिमंडल ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पांच साल की अवधि में 2,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली दो योजनाओं को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक के दौरान पांच विभागों के 10 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें पर्यटन से जुड़ी दो योजनाएं भी शामिल हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि सरकार ने पर्यटन आधारित आर्थिक विकास के लिए मजबूत आधार तैयार करने और राज्य भर में आतिथ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से आतिथ्य अवसंरचना हेतु भूमि बैंक के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
विश्वस्तरीय पर्यटन अवसंरचना के विकास में एक प्रमुख चुनौती आसानी से उपलब्ध, अतिक्रमण-मुक्त और निवेश के लिए तैयार भूखंडों की कमी रही है। बयान में कहा गया है कि इस कमी को दूर करने के लिए मंत्रिमंडल ने पर्यटन विभाग के तहत एक समर्पित पर्यटन भूमि बैंक गठित करने का निर्णय लिया है।
इस योजना के तहत, ओडिशा के प्रमुख पर्यटन स्थलों में सरकारी और निजी भूखंडों को मिलाकर लगभग 5,500 एकड़ भूमि की पहचान की जाएगी और उसे विकसित किया जाएगा। इनमें चिल्का, कोणार्क, पुरी (शामुका), धौली, हीराकुड, सतकोशिया, सिमिलिपाल, भीतरकनिका, दारिंगबाड़ी, देवमाली, बौद्ध सर्किट, जीरंगा, तालसारी और तमपारा आर्यपल्ली आदि शामिल हैं।
सरकार ने कहा कि यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्ष की अवधि में लागू की जाएगी, जिसके तहत प्रति वर्ष 300 करोड़ रुपये का परिव्यय होगा और कुल अनुमानित वित्तीय व्यय 1,500 करोड़ रुपये रहेगा।
सरकार ने कहा कि इस पहल से होटल, रिसॉर्ट, कन्वेंशन सेंटर, इको-टूरिज्म परियोजनाओं, मनोरंजन सुविधाओं तथा अन्य पर्यटन-संबंधी अवसंरचना में निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इसी प्रकार, राज्य सरकार ने 500 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ पांच वर्ष की अवधि में जलसमीप क्षेत्र विकास योजना को लागू करने का भी निर्णय लिया है।
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